Labour Chowk Shayari | Aur Ham Majdoor Hain | और हम मजदूर हैं

Labour Chowk Majdoor_Shayari

हमसे ना पूछो क्यों..
क्यों इतने मजबूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं

ज़िंदगी भारी लगती है..
चाहे मौसम हो सुहाना
दो वक्त रोटी गुज़ारिश अपनी..
नहीं तो पानी पीकर सो जाना

कोई गुजरता पास से अगर..
भीड़ इकट्ठी होती
उनका काम हमसे चलता..
हमें मिलती दो वक्त की रोटी

कपड़े नहीं तंगहाल ज़िन्दगी..
कैसी ये तकदीरें हैं
धूप से रंग हुआ काला..
मिटी हाथों की लकीरें हैं

ऐसा नहीं कि करम हमारे..
करम इतने खराब हैं
गम इतने ज़िंदगानी में..
कि पीते हम शराब हैं

कोई मदहोश सुरूर में है..
हम थकान से चूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं
हमसे ना पूछो क्यों..
क्यों इतने मजबूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं

रोज खोदते हैं हम कुआँ..
रोज पीते हैं पानी
कौन सुनेगा किसको सुनाएं ..
अपनी दर्द भरी ये कहानी

जड़ जिसकी हो जाए अलग..
वो फूल कभी नहीं खिलता
गैर हो जाते गरीबी में सब..
अपना कोई नहीं मिलता

शिकवे शिकायत किससे करें हम..
अपने आप से हारे हैं
कितने नियम कानून बने..
कोई नहीं हमारे हैं

मजदूर तो होते पर मजबूर नहीं..
काश कि वो समय आता
खुशी होती खुदकुशी नहीं..
जीवन संवर ये जाता

जख्म हैं इतने गहरे ये..
बन गए अब नासूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं
हमसे ना पूछो क्यों..
क्यों इतने मजबूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं

कब मांगी हमने मुराद बड़ी..
कब गाडी बंगला कोठी
तकदीर में अगर ये होता तो..
किस्मत यूँ ना सोती

कोई कीमत नहीं ज़िन्दगी..
ये आंसू नहीं थम पाते
खिंचे खिंचे से रहते वो..
जिनके काम हम आते

ख्वाहिश छोटी अपनी होती..
ज्यादा बड़ी कोई आस नहीं
जिनके लिए पसीना बहाते..
उनको ही आते हम रास नहीं

बंजर जमीन के जैसे हम..
बादल देख हमें मुड़ जाता
बून्द बून्द से भरता सागर..
यहाँ भाप बन के उड़ जाता

सुख का नामो निशान नहीं..
दुख यहाँ भरपूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं
हमसे ना पूछो क्यों..
क्यों इतने मजबूर हैं
ये लेबर चौक है..
और हम मजदूर हैं
और हम मजदूर हैं

Garibi Majdoor Shayari

Hamse Na Poocho Kyon..
Kyon Itne Majboor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain

Zindagi Bhaari Lagti Hai..
Chaahe Mausam Ho Suhaana
Do Waqt Roti Guzaarish Apni..
Nahi To Paani Peekar So Jaana

Koi Guzarta Paas Se Agar..
Bheed Ikaththi Hoti
Unka Kaam Hamse Chalta..
Hamei Milti Do Waqt Ki Roti

Kapde Nahi Tanghaal Zindagi..
Kaisi Ye Takdeerein Hain
Dhoop Se Rang Hua Kaala..
Miti Hatho Ki Lakeerein Hain

Aisa Nahi Ki Karam Hamaare..
Karam Itne Kharaab Hain
Gam Itne Zindgaani Mei..
Ki Peete Ham Sharaab Hain

Koi Madhosh Suroor Mei Hai..
Ham Thakaan Se Choor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain
Hamse Na Poocho Kyon..
Kyon Itne Majboor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain

Roj Khodte Hain Ham Kuan..
Roj Peete Hain Paani
Kaun Sunega Kisko Sunaayein..
Apni Dard Bhari Ye Kahaani

Jadd Jiski Ho Jaye Alag..
Wo Phool Kabhi Nahi Khilta
Gair Ho Jaate Gareebi Mei Sab..
Apna Koi Nahi Milta

Shikwe Shikaayat Kisse Karein Ham..
Apne Aap Se Haare Hain
Kitne Niyam Kanoon Bane..
Koi Nahi Hamaare Hain

Majdoor To Hote Par Majboor Nahi..
Kaash Ki Wo Samay Aata
Khushi Hoti Khudkushi Nahi..
Jeevan Sanvar Ye Jaata

Jakhm Hain Itne Gahre Ye..
Ban Gaye Ab Naasoor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain
Hamse Na Poocho Kyon..
Kyon Itne Majboor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain

Kab Maangi Hamne Muraad Badi..
Kab Gaadi Bangla Kothi
Takdeer Mei Agar Ye Hota To..
Kismat Youn Na Soti

Koi Keemat Nahi Zindagi..
Ye Aansu Nahi Tham Paate
Khinche Khinche Se Rahte Wo..
Jinke Kaam Ham Aate

Khwaahish Chhoti Apni Hoti
Jyaada Badi Koi Aas Nahi
Jinke Iiye Paseena Bahaate..
Unko Hi Aate Ham Raas Nahi

Banjar Jameen Ke Jaise Ham..
Baadal Dekh Hamei Mud Jaata
Bund Bund Se Bharta Saagar..
Yahan Bhaap Ban Ke Ud Jaata

Sukh Ka Naamo nishaan Nahi..
Dukh Yahan Bharpoor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain
Hamse Na Poocho Kyon..
Kyon Itne Majboor Hain
Ye Labour Chowk Hai..
Aur Ham Majdoor Hain
Aur Ham Majdoor Hain

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